दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर।  दोस्तो, आज हम एक ऐसी बीमारी के बारे में बात करेंगे जो सामान्य तापमान में कभी भी किसी को भी हो सकती है।  यह बहुत अधिक सर्दी या बहुत गर्मी में नहीं होती, ज्यादातर बरसात के मौसम में होती है।  दोस्तो, हम बात कर रहे हैं मलेरिया की जो मच्छर के काटने से फैलता है।  यही है हमारा आज का टॉपिक मलेरिया के घरेलू उपचार ।  बहुत अधिक सर्दी या गर्मी में मच्छर जिंदा नहीं रहते।  इसलिए इस बीमारी को फैलने के लिये बरसात का मौसम सबसे उचित होता है।  

दोस्तो, मलेरिया को जानने से पहले इसके लिये जिम्मेदार मच्छर के बारे में जानना बहुत जरूरी है तभी हम मलेरिया की संकल्पना (Concept) को सही तरह से समझ पायेंगे।  तो, पहले जानते हैं मच्छर के विषय में। 

मलेरिया के घरेलू उपचार

मच्छर क्या है? – What is Mosquito

दोस्तो, मच्छर कीट-पतंग की श्रेणी में आने वाला हानिकारक जन्तु है जो डेंगू और मलेरिया जैसी घातक और जानलेवा बीमारियों का कारण बनता है।  यह गंदगी, नाली, तालाब, गड्ढा, नहर, ठहरे हुऐ पानी में या नम जगह पर रहता है।  मादा मच्छर, नर मच्छर की अपेक्षा अधिक दिन तक जीवित रहता है, लगभग छः से आठ हफ्ते तक।  मादा मच्छर हर तीन दिन में 500 से अधिक अंडे देता है।  केवल मादा मच्छर ही मनुष्य या अन्य जन्तुओं के खून चूसता है, जबकि नर मच्छर पेड़-पौधों का रस के सहारे जिंदा रहते हैं।  

मादा मच्छर खून क्यों चूसते हैं? – Why do Female Mosquitoes Suck Blood

एक रिसर्च के अनुसार मादा मच्छरों को जीवित रहने के लिये और अंडे देने के लिये मानव और स्तनधारी जीवों  के खून की आवश्यकता होती है। 

मच्छर किसे ज्यादा काटते हैं? – What do Mosquitoes Bite More

दोस्तो, अमरीका की पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ साइंस में हुई एक शोध के अनुसार ओ (O) ब्लड ग्रुप वालों को मच्छर ज्यादा काटते हैं, ए (A)ब्लड ग्रुप की तुलना में दोगुना।  क्योंकि वैज्ञानिकों के अनुसार ओ ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों में ज्यादा प्रोटीन होते हैं।  बी (B) ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों को मच्छर सामान्य रूप से काटते हैं। 

मच्छर कितने प्रकार का होता है? – What is the type of Mosquito

दोस्तो, विश्व में मच्छरों की लगभग 3 हजार 500 प्रजातियां पाई जाती हैं।  हमारे देश भारत में तीन प्रकार के मच्छर पाये जाते हैं जिनका विवरण निम्न प्रकार है –

1. क्यूलेक्स (Culex) – यह बैठने की अवस्था में शरीर की सतह के सामानांतर रहता है।  संक्रमित मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने पर फाइलेरिया नामक रोग होता है।  

2.  एडीज इजिप्टी (Aedes aegypti) –  इसके शरीर पर सफेद और काली धारियां होती हैं और बैठने पर शरीर की सतह के सामानांतर रहता है।  यह डेंगू के लिये जिम्मेदार होता है।  

3.  ऐनोफिलीज (Anopheles) – इसके शरीर पर गहरे धब्बे वाले पंख होते हैं और शरीर पर बैठते समय सतह से कोण बनाता है।  इसके काटने से मलेरिया बनता है। 

मच्छर कहां कम होते हैं या बिल्कुल नहीं होते ? 

दोस्तो, देसी हैल्थ क्लब आपको कुछ ऐसे देशों के नाम बता रहा है जहां मच्छर या तो हैं ही नहीं या बहुत कम होते हैं –

1.  अंटार्कटिका (Antarctica)- यह महाद्वीप इतना ठंडा है कि मच्छर तो क्या कोई मानव या साधारण जीव-जन्तु भी जीवित नहीं रह सकते।  तापमान माइनस 90° सेल्सियस और सबसे ज्यादा तापमान 5° से 15° डिग्री सेल्सियस रहता है।  यहां सील, पेंग्विंन ही रहते हैं। 

2.  सेशेल्स (Seychelles)- अफ्रीका महाद्वीप में सबसे कम जनसंख्या वाला मलेरिया मुक्त देश।  केवल 92000 लोग रहते हैं।  यहां का ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स अफ्रीका के बाकी सभी देशों से ज्यादा है।  यहां पर प्राकृतिक रूप से स्तनधारी जीव नहीं हैं।  मच्छरों को जीवित रहने के लिए स्तनधारियों के खून की जरूरत होती है। 

3.  आइसलैंड (Iceland)- उत्तरी अटलांटिक महासागर में स्थित एक छोटा सा देश जो ग्रीनलैंड और यूरोप के बीच है।  यहां का तापमान भी बहुत कम है।  एक सिद्धान्त के अनुसार यहां के ठंडे मौसम में यह कीड़े जम जाते हैं।  दूसरे सिद्धान्त के अनुसार यहां के पानी और मिट्टी में एक अद्भुत केमिकल कंपोजिशन है जिसे कीड़े झेल नहीं पाते।  यहां का वातावरण मच्छरों को दूर खाड़ी में रहने पर विवश कर देता है। 

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4.  फ्रांस(France) – फ्रांस के दक्षिणी भाग में बहुत ही कम मच्छर होते हैं, बाकी फ्रांस में कहीं भी मच्छर नहीं होते।  क्योंकि फ्रांस का मैनेजमेंट बहुत ही अच्छा है जो पानी को कभी रुकने नहीं देता।  

5.  न्यू केलेडोनिया(New Caledonia) – यह दक्षिणी प्रशांत महासागर में ऑस्ट्रेलिया देश के पास है जोकि फ़्रांस का आधिकारिक क्षेत्र है। यहां मच्छर बहुत ही कम हैं और जो हैं जिका वायरस से ग्रस्त हैं।  

दोस्तो, मच्छरों के बारे में जानने के बाद अब आपको मलेरिया के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हैं जो निम्न प्रकार है :-

मलेरिया क्या है और इसके फैलने के क्या कारण होते हैं ?:-

दोस्तो, एक ऐसा रोग है जिसके लिये परजीवी (Parasite) और मादा एनोफेलीज़ (Anopheles) मच्छर जिम्मेदार होते हैं।  अर्थात् मादा एनोफेलीज़ मच्छर प्लास्मोडियम (Plasmodium) नामक परजीवी को उठाता है और मानव शरीर को दंश मार कर (काटकर) रक्त में छोड़ देता है।  काटे गये व्यक्ति के रक्त में जा कर ये परजीवी बढ़ने लगते हैं।  शुरुआत में ये परजीवी लिवर में रहते हैं और बढ़ने लगते हैं फिर ये लाल रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगते हैं।  बस यहीं से शुरु होता है मलेरिया।  अब प्रश्न यह है कि ये प्लास्मोडियम परजीवी क्या होते हैं? जानते हैं इस बारे में। 

प्लाज्मोडियम परजीवी (Plasmodium Parasites)- यह प्रोटोजोआ संघ का एकल-कोशिका (Single Cell) वाला जीव है, जो वायरस नहीं है।  प्लास्मोडियम अनेक भागों  में विभाजित हो जाने के बाद भी जिंदा रहता है।  इसकी कुछ प्रजातियां मलेरिया फैलाने वाली होती हैं।  अब थोड़ा प्रोटोज़ोआ के बारे में भी जान लेते हैं कि यह क्या है?

प्रोटोजोआ (Protozoa)- प्रोटोज़ोआ किसी अकेले जीव का नाम नहीं है बल्कि यह ऐसे जीवों का संघ है जिसके सभी सदस्य एकल-कोशिका (Single Cell) वाले होते हैं।  यह एकल-कोशिका अपने आप में सम्पूर्ण होती है अर्थात् जनन, पाचन, श्वसन, उत्सर्जन आदि सभी कार्य करती है।  प्रोटोज़ोआ इतने सूक्ष्म होते हैं कि इन्हें नंगी आँखों से  नहीं देखा जा सकता। 

प्लास्मोडियम परजीवी के प्रकार – Types of Plasmodium Parasites

ये पांच प्रकार के होते हैं परन्तु मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन ही के कारण मलेरिया बनता है – 

1.  प्लास्मोडियम फाल्सीपैरम (Plasmodium Falciparum) – यह सामान्य प्रकार का परजीवी है।  विश्व में ज्यादातर इसी के कारण मलेरिया के मरीजों  की मौत होती है।  

2. प्लाज्मोडियम विवाक्स (Plasmodium Vivax) – इसके द्वारा फैलाये गये मलेरिया में  प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम की अपेक्षा हल्के लक्षण होते हैं।  यह परजीवी तीन वर्ष तक लिवर में रह सकता है और दोबारा से मलेरिया हो सकता है। 

3.  प्लाज्मोडियम ओव्यूल (Plasmodium Ovale)- यह परजीवी असामान्य है जो कि पश्चिम अफ्रीका में पाया जाता है।  मलेरिया के कोई लक्षण दिखाई ना देने के बावजूद भी कई वर्षों लिवर में रह सकता है। 

मलेरिया के प्रकार और लक्षण – Types and Symptoms of Malaria

1.  अनकॉमक्लिकेटेड मलेरिया (Uncomplicated Malaria) – इसमें मलेरिया का बुखार तीन तरीके से चढ़ सकता है :-

(i) ठंड या कंपकंपी के साथ बुखार चढ़ता है। 

(ii) गर्मी लग के भी बुखार चढ़ सकता है। 

(iii) पसीना और थकावट के साथ बुखार हो सकता है। 

इस के लक्षण – Symptoms of this

(i)  बुखार। 

(ii) ठंड लगना और कंपकंपी

(iii) अचानक गर्मी लगना। 

(iv) पसीना आना। 

(v) सिरदर्द होना

(vi) मिचली आना और उल्टी होना। 

(vii) शरीर में दर्द और थकावट होना। 

2.  सीवियर मलेरिया (Sevior Malaria)- यह मलेरिया की गंभीर स्थिति होती है।  इस स्थिति में मलेरिया शरीर के अंगों में फैलकर उनकी क्रिया को प्रभावित करता है।  परिणामस्वरूप शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देते हैं।  इसके लक्षण इस प्रकार हैं –

लक्षण –  Symptoms

(i)   मस्तिषक संबंधी समस्यायें जैसे चक्कर आना, दौरे पड़ना, कोमा आदि। 

(ii)  रक्त जमावट की प्रक्रिया में असामान्यता। 

(iii) एनीमिया। 

(iv) किडनी संबंधी समस्या होना। 

(v)  सांस लेने तक में परेशानी होना।  

(vi) रक्तचाप का कम हो जाना।  

मलेरिया के घरेलू उपचार –  Home Remedies of Malaria

1.  नीम (Azadirachta indica)- दोस्तो, नीम औषधीय गुणों से सम्पन्न होने के कारण अनेकों बीमारियों के उपचार में  काम आता है।  मलेरिया के बुखार में भी यह बहुत लाभदायक है।  नीम के चार-पांच पत्ते और चार काली मिर्च मिर्च पीसकर थोड़े से पानी में मिला लें और उबाल लें।  थोड़ा ठंडा होने पर (गुनगुना रहे) छानकर पी लें।  नीम के एंटी-मलेरियल और एंटी-प्लाज्मोडियल गुण मलेरिया बुखार में फायदा करेंगे।  

2.  फिटकरी (Alum)- फिटकरी में मॉस्किटो लार्विसाइडल क्षमता होती है जो मलेरिया बुखार से राहत छुटकारा दिला सकते हैं।  इसके लिये थोड़ीसी फिटकिरी को भूनकर, पीसकर पाउडर बना लें।  बुखार चढ़ने से तीन घंटे पहले आधा चम्मच यह पाउडर पानी से पी लें।  आप चाहें तो इस पाउडर में जरा सी चीनी भी मिला सकते हैं।  हर दो घंटे के अंतराल पर यह पाउडर लेते रहें।  बुखार चढ़ने की संभावना नहीं होगी।  

3.  गिलोय (Giloy)- गिलोय डेंगू और मलेरिया के उपचार में सर्वोत्तम उपाय है और अमृत के समान मानी जाती है।  गिलोय, तुलसी पत्ते और काली मिर्च उबाल कर काढ़ा बनाकर दिन में 3-4 बार पीयें।  या इन सब को (गिलोय के पत्ते कुचलकर) मिट्टी के बर्तन में भिगोकर रात भर के लिये रख दें।  सुबह छानकर पीयें।  गिलोय की गोलियां भी मिलती हैं वह भी ले सकते हैं।   

4.  तुलसी (Basil)- थोड़े से तुलसी के तुलसी पत्ते और चार-पांच काली मिर्च पीसकर शहद के साथ दिन में तीन बार सेवन करें।   बुखार में आराम मिलेगा।  आप बिना शहद के भी ले सकते हैं।  तुलसी में एंटी-मलेरिया गुण होते हैं जिनके कारण नियमित रूप से सेवन करने पर मिचली, उल्टी, दस्त और बुखार में राहत मिलती है। 

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5.  दालचीनी (Cinnamon)- दालचीनी की जितनी प्रशंसा की जाये उतनी कम है।  मलेरिया बुखार में यह रामबाण की तरह काम करती है।  इसमें एंटीप्लास्मोडियल गुण होते हैं जो मलेरिया के परजीवी  प्रभाव को खत्म करते हैं और प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (Plasmodium falciparum) के लिये बाधा बन जाते हैं।  दालचीनी में सिनामाल्डिहाइड (cinnamaldehyde) होने के कारण इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीबैक्टीरियल, एंटीसेप्टिक, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण मौजूद होते हैं।  मलेरिया बुखार में एक चम्मच दालचीनी पाउडर और एक चुटकी काली मिर्च पाउडर एक गिलास पानी में डालकर उबाल लें  और थोड़ा ठंडा होने पर एक चम्मच शहद मिलाकर पीयें।  चाय में दालचीनी डालकर पीने से भी फायदा होगा। 

6.  हल्दी (Turmeric)- हल्दी भी औषधीय घूनों से समृद्ध होती है।  हल्दी में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं जो मलेरिया के विषाक्त पदार्थों को शरीर से निकालने में मदद करते हैं।  ये  मांसपेशियों में दर्द और जोड़ों के दर्द को खत्म करते हैं।  साथ ही इसमें करक्यूमिन नामक तत्व पाया जाता है जो मलेरिया परीजीवी के प्रभाव को खत्म करने में सक्षम होता है।  रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पीयें। 

7. मेथी (Fenugreek) – मेथी दाने में एंटी-प्लाज्मोडियल प्रभाव होने के कारण मलेरिया जल्दी ठीक हो जाने की संभावना रहती है।  डॉक्टर्स भी मलेरिया के रोगियों को मेथी खाने की सलाह देते हैं।  मेथी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने के साथ-साथ मलेरिया के कारण आई कमजोरी को दूर करती है।  रात को एक गिलास पानी में थोड़ी सी मेथी दाना भिगो दें, सुबह खाली पेट इस पानी को पीयें।  

8.  अदरक(Ginger) – अदरक के जिन्जेरॉल (gingerol) नामक घटक (Component) में एंटी-माइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो मलेरिया से होने वाले दर्द, मिचली, उल्टी आदि में आराम दिलाते हैं, पाचन प्णाली को बढ़ाते हैं और इसमें मौजूद एंटी-मलेरिया गुण मलेरिया बुखार में राहत देते हैं।  अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर डेढ़ कप पानी में तब तक उबालें जब तक पानी एक कप ना रह जाये।  इसे छानकर, थोड़ा ठंडा करके चाय की तरह पीयें।  या अदरक के टुकड़ों में कुछ किशमिश डालकर उबालें।  इस पानी को ठंडा करते हुऐ गुनगुना रहने पर दिन में दो बार पीयें।  

9.  सेब का सिरका (Apple vinegar)- सेब के सिरके में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी माइक्रोबियल और एंटीपैथोजेनिक गुण होते हैं जो परजीवियों के प्रभाव को खत्म कर पाने में सक्षम होते हैं।  मलेरिया बुखार के समय में एक गिलास पानी में दो चम्मच सेब का सिरका मिलाकर खाना खाने से एक घंटा पहले पी लें।  

10.  कलौंजी (Nigella Seeds)- कलौंजी में एंटी-मलेरियल प्रभाव होता है जो मलेरिया की दवा यदि आप ले रहे हैं जैसे क्लोरोक्वीन तो दवा के प्रभाव को बढ़ाने में मदद करता है।  कलौंजी के एंटीऑक्सीडेंट गुण मलेरिया के प्लाज्मोडियम प्लास्मोडियम परजीवी के विरुद्ध लड़ते हैं।  सुबह भोजन से पहले आधा चम्मच कलौंजी पाउडर को पानी के साथ सेवन करें।  इसे स्मूदी में मिलाकर भी खाया जा सकता है। 

11. पपीता के पत्ते (Papaya leaves)- पपीता के पत्ते डेंगू में तो काम करते ही हैं, मलेरिया बुखार के उपचार में भी लाभदायक होते हैं।  यह एंटी-मलेरिया के रूप में काम करते हैं।  पपीता के चार-पांच पत्तों को छोटा-छोटा काट कर पानी में डालकर अच्छी तरह उबाल लें।  उबालते समय पानी में दो, तीन टुकड़े नींबू के भी डाल दें।  छानकर ठंडा करके पी लें।  दिन में दो, तीन बार पी सकते हैं।  

12.  ग्रीन टी और इमली (Green Tea and Tamarind)- ग्रीन टी में एपिगैलोकैटेचिन-3-गैलेट और एपिकैटेचिन गैलेट दो तत्व होते हैं जिनके ग्रीन टी में एंटी-मलेरिया गुण पाये जाते हैं जो मलेरिया के प्रभाव को करते हैं।  सिर दर्द और बदन दर्द में राहत देते हैं।  ग्रीन टी के एंटीऑक्सीडेंट गुण इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं।  इमली में एंटीबैक्टीरियल, एंटीऑक्सीडेंट, एंटीमलेरियल और एंटी अस्थेमेटिक गुण होते हैं।  एक कप गर्म पानी में एक ग्रीन टी बैग और एक छोटा टुकड़ा इमली का डाल दें।  थोड़ी देर बाद, चाय छानकर पी लें।  दिन में दो बार इस चाय को पीयें।  

मलेरिया में क्या खाना चाहिए – What to Eat in Malaria

दोस्तो, मलेरिया होने पर विशेषज्ञ विटामिन, खनिज और सूक्ष्म पोषक (Micronutrients) युक्त भोजन/खाद्य पदार्थ लेने को कहते हैं, जो शीघ्र पच जाये और  शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाये, जैसे कि :-

1.  खिचड़ी, दलिया, साबुदाना। 

2.  सादा दाल, रोटी और हरी सब्जियां। 

3.  हरा सलाद। 

4.  गाजर, चुकंदर, पपीता, कीवी

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5.  सूप, नारियल पानी, इलेक्ट्रॉल पानी। 

6.  मांसाहारी लोग, अंडे, मछली का सेवन डॉक्टर की सलाह पर कर सकते हैं। 

मलेरिया में क्या न खाएं – What not to eat in malaria

1.  जंक फूड

2.  तीखे मिर्च मसाले वाले, तले भुने, फैट वाले खाद्य पदार्थ। 

3.  बाहर के खाना को अवाइड करें। 

4.  सॉस, अचार आदि खट्टे पदार्थ।  

5.  केक, चाकलेट, पेस्ट्री 

6.  कोल्ड ड्रिंक्स, आइसक्रीम। 

7.  चाय व कॉफी। 

8.  मीट, चिकन। 

9.  शराब व अन्य नशीले पदार्थ। 

कुछ सावधानियां – Some Precautions

1.  घर के बाहर आस पास पानी जमा न होने दें।  

2.  घर की खिड़कियों पर मच्छर जाली लगवायें। 

3.  कपड़े ऐसे पहनें जिनसे शरीर के अधिकांश भाग कवर हो जायें।  बच्चों भी इसी तरह को पहनायें। 

4.  घर के फर्श को पानी में फिनायर, डिटोल, लाईजोल आदि मिलाकर सफाई करवायें। 

5.  पीने का पानी और छत पर पानी की टंकी ढंके होने चाहिये।  

6.  कूलर का पानी सप्ताह में 2 या 3 बार बदलें। 

7.  गमलों में पानी जमा ना होने दें। 

8.  नगर निगम से संपर्क कर एंटी लार्वा का छिड़काव करवायें और घरों में मच्छर मारने वाला धूंआं करवायें।  मच्छर मारने वाली दवा का छिड़काव करवायें। 

9.   सोने से पहले हाथ-पैर और शरीर के खुले हिस्सों पर मच्छर भगाने वाली क्रीम या कड़वा तेल लगायें। 

10.  मच्छरों को भगाने के लिए घर में गुग्गुल जलायें। 

Conclusion

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको मच्छर के विषय में विस्तृत जानकारी दी।  इसके अतिरिक्त मलेरिया के घरेलू उपचार के बारे में भी विस्तार पूर्वक जानकारी दी।  मलेरिया क्या होता है, कैसे फैलता है, इसके कितने प्रकार होते हैं, मलेरिया बुखार के लक्षण क्या होते हैं, इस बारे में भी बताया।  दोस्तो, इस लेख के माध्यम से मलेरिया बुखार से छुटकारा पाने के देसी उपाय, क्या खाना चाहिये क्या नहीं खाना चाहिये और कुछ सावधानियों के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया।   आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा।  आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर करें।  ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें।  दोस्तो, हमारा आज का यह लेख आपको कैसा लगा, इस बारे में कृपया अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके।  और हम आपके लिए ऐसे ही Health- Related Topic लाते रहें।  धन्यवाद। 

Disclaimer- यह लेख केवल जानकारी मात्र है।  किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर उत्तरदायी नहीं है।   कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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मलेरिया के घरेलू उपचार
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आज के लेख में हमने आपको मच्छर के विषय में विस्तृत जानकारी दी। इसके अतिरिक्त मलेरिया के घरेलू उपचार के बारे में भी विस्तार पूर्वक जानकारी दी।
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1 Comment

Shiv Kumar Kardam · April 26, 2021 at 4:42 pm

So detailed and beneficiary information.

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