दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, कई रोग वायरस के कारण फैलते हैं जिनके लिये बड़ी-बड़ी रिसर्च होती रही हैं और उपचार के लिये यथासंभव प्रयास किये जाते रहे हैं। वायरस के मामलों में अधिकतर सफलता मिली है और दवाओं का निर्माण हुआ है। उदाहरण के तौर पर सबसे पहले सन् 1796 में डॉक्टर एडवर्ड जेनर ने अपने रिसर्च से पता लगाया कि चेचक विषाणु यानी वायरस के कारण होती है और उन्होंने चेचक के टीके का भी आविष्कार करके सारी दुनियां पर उपकार किया। अभी वर्तमान में, कोरोना वायरस का प्रकोप पूरी दुनियां ने देखा है। इससे बचाव के लिये पूरी दुनियां के वैज्ञानिकों ने अपनी जान लगा दी और अथक प्रयासों के परिणाम स्वरूप वैक्सीन का आविष्कार हुआ तब जाकर कुछ राहत मिली। अभी एक और वायरस चर्चा में है। यद्यपि इसका इतिहास बहुत पुराना है परन्तु कुछ ही वर्ष पूर्व यह भारत में देखा गया था और अभी फिर से यह चर्चा में है जिसकी आज तक कोई दवा नहीं बनी, कोई वैक्सीन नहीं बनी। जी हां, हम बात कर रहे हैं जीका वायरस की जो भारत में अपने पैर पसार रहा है और इसकी कोई विशेष दवाई भी नहीं है। फिर इससे बचा कैसे जाये? दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “जीका वायरस से बचाव के उपाय”। देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से आज आपको जीका वायरस के बारे में विस्तृत जानकारी देगा और इससे बचने के उपाय भी बतायेगा। मगर इससे पहले यह जानना जरूरी है कि वायरस क्या होता। तो, सबसे पहले जानते हैं कि वायरस क्या होता है और कितने प्रकार का होता है, इसके बाद जानेंगे कि जीका वायरस क्या होता है, इसके जन्म स्थल और फैलाव के बारे में। फिर इसके बाद बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

जीका वायरस से बचाव के उपाय

वायरस क्या होता है? – What is a Virus?

दोस्तो, वायरस जिसे हिन्दी में विषाणु कहा जाता है के नाम से ही व्याख्या हो जाती है कि विष यानी ज़हर के अणु को विषाणु कहा जाता है। विषाणु मनुष्यों और पशुओं को संक्रमित कर कैंसर सहित अनेक रोगों का कारण होता है। वायरस कोई कोशिकाऐं नहीं है बल्कि अनेक गैर जीवित, संक्रामक, अति सूक्षम कण (अणु) होते हैं। ये अणु बैक्टीरिया से भी लगभग 1000 गुना छोटे होते हैं इनको केवल इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा ही देखा जा सकता है। हमने वायरस के लिये, ऊपर “गैर जीवित” शब्दों का प्रयोग किया है क्योंकि इनका अपना तब तक कोई वजूद (अस्तित्व) नहीं होता जब तक कि इनको कोई जीवित शरीर ना मिल जाये। ये किसी भी पर्यावरण में हजारों वर्ष तक सुसुप्त अवस्था में रह सकते हैं और कोई जीवित कोशिका के मिलने पर जीवित हो उठते हैं। अर्थात् ये अपने पुनरुत्पादन (Reproduction) के लिये एक जीवित कोशिका पर निर्भर रहते हैं। निष्कर्षतः वायरस एक ऐसा जेनेटिक तत्व है जो जीवित और निर्जीव अवस्थाओं के बीच में कहीं आता है। सन् 1898 में, फ्रेडरिक लोफ्लर और पॉल फ्रॉश को शोध में पता चला कि पशुओं में पैर और मुंह की बीमारी का कारण कोई बैक्टीरिया से भी छोटा संक्रामक कण है। यह तथ्य वायरस की प्रकृति का पहला संकेत माना जाता है।

वायरस के प्रकार – Type of Virus

दोस्तो, वायरस तीन प्रकार का होता है। विवरण निम्न लिखित है – 

1. एनिमल वायरस (Animal Virus)- यह वायरस मानव और पशुओं की कोशिकाओं को संक्रमित करता है। इन्फ्लूएंजा वायरस, रैबीज वायरस, पोलियो वायरस, स्माल पॉक्स वायरस, हेपेटाइटिस वायरस, राइनो वायरस आदि एनिमल वायरस के उदहारण हैं। इनकी जेनेटिक सामग्री आरएनए या डीएनए होता है। 

2. प्लांट वायरस (Plant Virus)- यह पेड़, पौधों को संक्रमित करने वाला वायरस होता है।  इनकी जेनेटिक सामग्री प्रोटीन की खोल में रहने वाले आरएनए में होता है। उदाहरण के लिए, टोबेको मोजेक वायरस (तंबाकू विषाणु), पोटेटो वायरस (आलू विषाणु),  टोमेटो येलो लीफ़ कर्ल वायरस (टमाटर की पत्ती), बनाना बंची टॉप वायरस (केला व अन्य फसलों का विषाणु), बीट येलो वायरस और टर्निप येलो वायरस आदि। 

3. बैक्टीरियोफेज (Bacteriophage)- यह जीवाणु या बैक्टीरिया की कोशिकाओं को खाता है इसीलिये इसे जीवाणुभोजी विषाणु कहा जाता है। इनकी जेनेटिक सामग्री डीएनए होता है। यह कई प्रकार का होता है और प्रत्येक प्रकार का बैक्टीरियोफेज केवल एक प्रजाति या बैक्टीरिया के केवल एक स्ट्रेन को संक्रमित करता है। 

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जीका वायरस क्या है? – What is Zika Virus?

जैसा कि नाम से जाहिर है कि “जीका” नामक एक वायरस है जो मनुष्यों को संक्रमित कर उनको बीमार करता है। डेंगू के समान यह भी मच्छर जनित रोग है जो एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। यह वही मच्छर है जो डेंगू, चिकनगुनिया फैलाने के लिये जिम्मेदार होता है। यद्यपि जीका वायरस से कोई गंभीर समस्या नहीं होती परन्तु गर्भवती महिलाओं के लिये और गर्भस्थ शिशु के लिए खतरनाक हो सकता है। यह गंभीर जन्म दोष बर्थ डिफेक्‍ट (Birth Defect) उत्पन्न कर सकता है जिसे वैज्ञानिक भाषा में माइक्रोसेफली कहा जाता है। इसके अतिरिक्त गंभीर मस्तिष्क दोष होने की भी संभावना हो सकती है। कई अध्‍ययन यह बताते हैं कि जीका वायरस से गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) (नर्वस सिस्‍टम की असामान्‍य बीमारी) होने की भी संभावना रहती है। जीका वायरस से संक्रमित होने वाले व्‍यक्तियों में से केवल एक छोटे से वर्ग को GBS हुआ है। यह भी संभावना रहती है कि जीका से एक बार संक्रमित हो जाने पर व्‍यक्ति भविष्य में दुबारा जीका वायरस से संक्रमित ना हो। यह वायरस कैसे फैलता है, इस बारे में हम आगे बतायेंगे।

जीका वायरस की जन्मस्थली – Birthplace of Zika Virus

जीका वायरस की जन्मस्थली पूर्वी अफ्रीका में स्थित युगांडा गणराज्य है। विश्व स्वास्थ संगठन (WHO) के अनुसार सन् 1947 में, इसे पहली बार युगांडा के बंदरों में पहचाना गया था। इसको, युगांडा के ज़िका वन से “जीका वायरस” नाम मिला, जहां वायरस को 1947 में पहली बार अलग किया गया था। सन् 1952 में युगांडा और तंजानिया में मनुष्यों में इसकी पहचान स्थापित हुई।

जीका वायरस का फैलाव – Spread of Zika Virus

दोस्तो, अब बताते हैं आपको कि किस तरह इस वायरस का प्रकोप दुनियां में फैला। विवरण निम्न प्रकार है –

1. वर्ष 1952 – युगांडा में एक सीरोलॉजिकल सर्वेक्षण के परिणामों के अनुसार जीका वायरस, मनुष्यों को संक्रमित करने के लिये जाना गया। 99 मनुष्यों के बल्ड सेंपल में से, 6।1% एंटीबॉडी को खत्म करने वाले थे। 1952 में ही तंजानिया में मनुष्यों में इसकी पहचान हुई। 

2. वर्ष 1954 – शोधकर्ताओं ने एक मरीज के पीलिया के संदेह में वायरस के अलगाव के बारे में बताया। मगर बाद में इसे स्पोंडवेनी वायरस के रूप में दिखाया। 

3. वर्ष 1956 – स्पोंडवेनी को, एक शोधकर्ता ने एक स्व-प्रवृत्त संक्रमण (Self-inflicted infection) के कारण के रूप में भी निर्धारित कर दिया था। 

4. वर्ष 1960 से 1980 के बीच – 1960 से 1980 के बीच यह वायरस अफ्रीका और एशिया में फैल चुका था। सन् 1964 में सिम्पसन ने, मानव संक्रमण का पहले सच्चे केस की पहचान की थी। सिम्पसन मच्छरों से वायरस को अलग करते हुए स्वयं संक्रमित हो गये थे। 1960 से 1980 के बीच जीका वायरस के कम मामले पाये गये जिन्हें सामान्यतः  हल्की बीमारी होती थी। 

5. 1980 से 2007 – इस बीच अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया में जीका वायरस के केवल 13 मामले आये जिनमें 2007 में याप द्वीप (माइक्रोनेशिया के संघीय राज्य) में पहला केस सामने आया। 

6. वर्ष 2013 – सन् 2013 में फ्रेंच पोलिनेशिया और प्रशांत क्षेत्र के दूसरे देशों में जीका वायरस के संक्रमण का प्रकोप बड़े स्तर पर दिखाई दिया।

7. वर्ष 2015 – मार्च 2015 में, ब्राजील की तरफ से दाने की बीमारी के एक बड़े प्रकोप की सूचना दी गई, जिसकी पहचान बहुत जल्दी जीका वायरस संक्रमण के रूप में कर ली गई। जुलाई 2015 में इस वायरस का संबंध गुइलिन-बैरे सिंड्रोम (GBS) से जुड़ा हुआ पाया गया। 

अक्टूबर 2015 में, ब्राजील ने जीका वायरस संक्रमण और माइक्रोसेफली के बीच के संबंध के विषय में जानकारी दी। जीका वायरस का प्रकोप और फैलाव (Transmission) जल्द ही पूरे अमेरिका, अफ्रीका और विश्व के अन्य देशों/क्षेत्रों में दिखाई दिये जाने लगे। 

8. अब तक – आज तक की स्थिति यह है कि कुल 86 देशों और क्षेत्रों में जीका वायरस संक्रमण के मामले दर्ज किये गये हैं। 

भारत में जीका वायरस की स्थिति – Status of Zika Virus in India

दोस्तो, अपने देश भारत में जीका वायरस की स्थिति निम्न प्रकार है – 

1. 15 मई, 2017 को गुजरात में जीका वायरस के तीन मामले रिपोर्ट हुऐ। 

2. वर्ष 2018 के अंत तक राजस्थान में 159 और मध्य प्रदेश में 127 मामले दर्ज हुऐ।  

3. मई 2021 से 6 अगस्त 2021 तक – जुलाई 2021 में केरल में जीका वायरस का पहला केस सामने आया। इसके बाद जब 19 अन्य व्यक्तियों के परीक्षण से 13 व्यक्तियों के सकारात्मक परिणाम मिले जिससे यह पता चलता है कि यह जीका वायरस कम से कम मई 2021 में ही केरल में दस्तक देकर फैल रहा था। 6 अगस्त 2021 तक इस राज्य में 65 मामले सामने आये।

4. अक्टूबर 2021 – उत्तर प्रदेश राज्य के कानपुर शहर में जीका वायरस संक्रमण के तीन मामले सामने आये जिनमें एक भारतीय वायु सेना के एक वारंट ऑफिसर भी है। 

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जीका वायरस से संक्रमण कैसे फैलता है? – How Does Infection with Zika Virus Spread?

1. दोस्तो, जीका वायरस, मलेरिया से एकदम विपरीत, एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है और जब यही मच्छर दूसरे व्यक्ति को काट ले तो उसे भी हो जाता है। यह वही मच्छर है जिसके काटने से डेंगू और चिकनगुनिया हो जाता है जबकि मलेरिया ऐनोफ्लीज मच्छर के काटने से फैलता है। मलेरिया पर अधिक जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “मलेरिया के उपचार के देसी उपाय” पढ़ें। डेंगू पर विस्तृत जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “डेंगू से छुटकारा पाने के देसी उपाय” पढ़ें।

2. ऐसे स्थान पर जाने से जहां जीका वायरस की मौजूदगी/प्रकोप हो, संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।

3. ब्लड ट्रांसफ्यूजन के जरिए भी इस वायरस से संक्रमण फैल सकता है। 

4. सेक्सुअल ट्रांसमिशन के समय भी इसके फैलने की संभावना रहती है अर्थात् यदि संक्रमित व्यक्ति अपने पार्टनर से सेक्स करता है तो यह संक्रमण उसके पार्टनर को भी हो सकता है। 

5. गर्भवती महिला को यदि यह वायरस अपनी चपेट में ले लेता है तो गर्भस्थ शिशु को भी संक्रमण होने का खतरा हो सकता है। 

जीका वायरस, डेंगू और कोरोना में अंतर – Difference between Zika virus, Dengue and Corona

दोस्तो, जीका वायरस, डेंगू और कोरोना वायरस में निम्नलिखित अंतर स्पष्ट देखे जा सकते हैं। 

1. बुखार तो जीका वायरस, डेंगू और कोरोना इन तीनों में ही होता है परन्तु कोरोना में स्वाद और गंध न आने की समस्या होती है जबकि जीका वायरस संक्रमण और डेंगू में, स्वाद और गंध न आने की कोई दिक्कत नहीं होती। 

2. कोरोना में मरीज को सांस ना आने की समस्या होती है जबकि जीका वायरस और डेंगू में सांस ना आने की कोई दिक्कत नहीं होती।

3. डेंगू के मरीज की ब्लड प्लेटलेट्स बहुत तेजी से गिरती हैं, इनको संभालना मुश्किल हो जाता है जबकि जीका संक्रमण और कोरोना में ब्लड प्लेटलेट्स सामान्य रहती हैं, ये कम नहीं होतीं। 

जीका वायरस संक्रमण के लक्षण – Symptoms of Zika Virus Infection

दोस्तो, जीका वायरस से संक्रमण होने पर इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं सामान्यतः फ्लू, डेंगू और मलेरिया के लक्षणों के समान। इसमें मरीज की मृत्यु की संभावना बहुत कम होती है। गंभीर मामलों को छोड़कर, अस्पताल में भर्ती होने की भी जरूरत नहीं पड़ती। जीका वायरस संक्रमण के निम्नलिखित लक्षण प्रकट हो सकते हैं –

1. तेज बुखार होना 

2. आंखों में दर्द, आंखें लाल होना।

3. सिर में दर्द।

4. मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द।

5. शरीर पर लाल चकत्ते पड़ना।

6. कमजोरी महसूस होना। 

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जीका वायरस का परीक्षण – Zika Virus Test

जीका वायरस के परीक्षण का कोई विशेष टैस्ट नहीं है। मरीज के लक्षणों के आधार पर डॉक्टर बल्ड और यूरिन टैस्ट कर सकते हैं। वैसे रेपिड डिटेक्शन टेस्ट भी उपलब्ध हैं, वे जीका वायरस संक्रमण की पुष्टि कर सकते हैं। 

जीका वायरस का उपचार – Treatment of Zika Virus

1. चूंकि जीका वायरस के उपचार के लिये कोई विशेष दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर आपको पैरासिटामोल/एसिटामिनोफेन लेने की सलाह दे सकते हैं। पैरासिटामोल/एसिटामिनोफेन एक एनाल्जेसिक है जो दर्द पैदा करने वाले केमिकल मेसेंजर्स को ब्लॉक कर दर्द से आराम दिलाती है और बुखार को भी कम करती है। यह जीका वायरस से संक्रमण के लक्षणों में आराम दिला सकती है। घर पर ही उपचार हो जाता है, केवल गंभीर मामले में अस्पताल में भरती होने की नौबत आ सकती है। 

2. डॉक्टर आपको मल्टिविटामिन्स के कैपसूल भी दे सकते हैं।

3. पानी खूब पीयें। पानी ज्यादा पीने से दवाओं का असर ज्यादा होता है। 

4. फ्रूट जूस लेते रहें।

5. विटामिन, खनिज पदार्थ और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर भोजन करें। 

6. घर पर ही आराम करें। फालतू में कहीं घूमें नहीं।  

जीका वायरस से बचाव के उपाय – Ways to Prevent Zika Virus

दोस्तो, मच्छर जनित बीमारियों जैसे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जीका वायरस संक्रमण से बचने के लिये केवल बचाव ही उपाय होता है। इसके लिये आप निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं :-

1. उन स्थानों पर ना जायें ने जहां जीका वायरस का प्रकोप हो।

2. रात को मच्छरदानी लगाकर सोयें या मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती/ऑलआउट आदि जलाकर सोयें, या कमरे में गुग्गुल जलायें या नीम के पत्तों का धूआं करें।

3. दिन में ऐसे कपड़े पहनें जिनसे अधिकतर शरीर ढका रहे। 

4. एयर कंडीशन और ट्रे को खाली करते रहें। फ्रिज के डिफ्रास्ट ट्रे में पानी जमा ना होने दें।

5. सुनिश्चित करें कि घर के बाहर आस पास पानी जमा न होने पाये। 

6. घर की खिड़कियों पर मच्छर जाली लगी होनी चाहियें।

7. घर के फर्श की सफाई पानी में फिनायर, डिटोल, लाईजोल आदि मिलाकर करवायें।

8. पीने का पानी और छत पर पानी की टंकी ढंक कर रखें। 

9. कूलर का पानी सप्ताह में कम से कम 2 बार बदलें।

10. गमलों/टायर फालतू के बर्तनों में पानी जमा ना होने दें।

11. नगर निगम से संपर्क कर एंटी लार्वा का छिड़काव करवायें और घरों में मच्छर मारने वाला धूआं करवायें। मच्छर मारने वाली दवा का भी छिड़काव करवायें।

12.  रात को सोने से पहले हाथ-पैर और शरीर के खुले हिस्सों पर मच्छर भगाने वाली क्रीम या कड़वा तेल लगायें।

Conclusion – 

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको वायरस और जीका वायरस से बचाव के उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वायरस क्या होता है, वायरस के प्रकार, जीका वायरस क्या है, जीका वायरस की जन्मस्थली, जीका वायरस का फैलाव, भारत में जीका वायरस की स्थिति, जीका वायरस से संक्रमण कैसे फैलता है, जीका वायरस, डेंगू और कोरोना में अंतर, जीका वायरस संक्रमण के लक्षण और जीका वायरस का परीक्षण, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस लेख के माध्यम से जीका वायरस से बचाव के उपाय भी बताये। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस लेख से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो लेख के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह लेख आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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जीका वायरस से बचाव के उपाय
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दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको वायरस और जीका वायरस से बचाव के उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वायरस क्या होता है, वायरस के प्रकार, जीका वायरस क्या है, जीका वायरस की जन्मस्थली, जीका वायरस का फैलाव, भारत में जीका वायरस की स्थिति, जीका वायरस से संक्रमण कैसे फैलता है, जीका वायरस, डेंगू और कोरोना में अंतर, जीका वायरस संक्रमण के लक्षण और जीका वायरस का परीक्षण, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।
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1 Comment

Shiv Kumar Kardam · November 20, 2021 at 4:49 am

Extraordinary Article

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