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दोस्तो, स्वागत है आप सब का हमारे ब्लॉग पर। आज का हमारा आर्टिकल महिलाओं की सेवा में समर्पित है। दोस्तो, महिलाओं का जीवन परिवर्तनशील है। उसके शरीर में परिवर्तन होते रहते हैं। जब वह 14-15 वर्ष की होती है तब उसको मासिक धर्म शुरु हो जाते हैं। जवान होने पर उसकी शादी, और शादी के बाद वह गर्भवती हो जाती है। फिर वो पल आता है जो उसके जीवन का सबसे सुंदर और सुखदायक पल होता है यानी वह बच्चे को जन्म देती है। समय बीतता रहता है, जीवन चलता रहता है और फिर उसके शरीर में एक परिवर्तन ऐसा आता है जो शुरूआत में कष्टकारी होता है मगर कुछ समय बाद वह सामान्य हो जाती है। यह परिवर्तन उसके जीवन में एक ही बार आता है, 45 से 50 वर्ष की आयु के बीच। यह परिवर्तन ऐसा होता है कि उसके मासिक धर्म हमेशा के लिये बंद हो जाते हैं जिसके चलते वह कभी मां नहीं बन सकती। दोस्तो, इस प्राकृतिक परिवर्तन का नाम है रजोनिवृत्ति और यही है हमारा आज का टॉपिक “रजोनिवृत्ति क्या होती है?“।

देसी हैल्थ क्लब इस आर्टिकल के माध्यम से आज आपको रजोनिवृत्ति के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि इसके लक्षणों के प्रभाव को कम करने के घरेलू उपाय उपाय क्या हैं। तो, सबसे पहले एक स्पष्टीकरण और फिर जानते हैं कि रजोनिवृत्ति क्या होती है और रजोनिवृत्ति की उम्र। फिर इसके बाद बाकी बिन्दुओं पर जानकारी देंगे।

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रजोनिवृत्ति क्या होती है?
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स्पष्टीकरण – The Explanation

दोस्तो, सबसे पहले देसी हैल्थ क्लब यह स्पष्ट करता है की रजोनिवृत्ति एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो महिलाओं में  एक विशेष उम्र में या इसके आसपास होता है। यह कोई रोग नहीं है जिसके लिये उपचार की आवश्यकता हो या इससे बचाव का कोई उपाय किया जाये। हां, इसके लक्षणों के प्रभाव को कम करने के लिये कुछ उपाय किये जा सकते हैं ताकि महिलाओं को होने वाली तकलीफ़ से कुछ राहत मिल सके।

रजोनिवृत्ति क्या होती है?-  What is Menopause

दोस्तो, रजोनिवृत्ति (Menopause) एक प्राकृतिक स्थिति है जिसमें महिला को एक विशेष उम्र पर मासिक धर्म स्थाई रूप से बंद हो जाता है। यदि किसी महिला को एक वर्ष तक मासिक धर्म ना आये तो इसे रजोनिवृत्ति कहा जाता है। इस स्थिति में महिला गर्भवती नहीं हो सकती क्योंकि ओवरी यानी अंडाशय में अंडा बनने की प्रक्रिया बंद हो जाती है। ओवरी द्वारा अंडे बनाने की प्रक्रिया को ओव्यूलेशन कहा जाता है मगर उम्र बढ़ने के साथ-साथ इसकी कार्यक्षमता कम होती जाती है। पेरिमेनोपॉज (Perimenopause) रजोनिवृत्ति के पहले की अवस्था होती है जो 40 वर्ष की उम्र के मध्य से शुरू होती है इसमें पीरियड्स अनियमित होने शुरू हो जाते हैं।  मेनोपॉज में पीरियड्स आना बिल्कुल बंद हो जाते हैं। कुछ महिलाओं में पेरिमेनोपॉज की अवस्था आती ही नहीं है, वे सीधे मेनोपॉज की अवस्था में चली जाती हैं। 

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रजोनिवृत्ति की उम्र – Age of Menopause

अब रहा यह प्रश्न कि रजोनिवृत्ति किस आयु में होती है तो समझ लीजिये कि रजोनिवृत्ति निर्भर करती है महिला के स्वास्थ्य, हार्मोन और उनके भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर। पूरी दुनियां में महिलाओं में रजोनिवृत्ति की औसतन उम्र 51 है। परन्तु भारतीय महिलाओं के लिए ये उम्र 46।2 वर्ष है अर्थात् भारतीय महिलाओं में रजोनिवृत्ति 45 से 50 वर्ष तक की आयु में कभी भी हो सकती है। 40 वर्ष की आयु में मासिक धर्म की अवधि कम या ज्यादा हो सकती है और “बहाव” हल्का या ज्यादा हो सकता है। लेकिन 45 से 50 वर्ष की उम्र आते-आते पीरियड्स बंद हो जाते हैं। हां, यदि समय से पहले किसी महिला को रजोनिवृत्ति समय से पहले हो जाये तो यह चिंताजनक हो सकता है क्योंकि इससे प्रजनन क्षमता में तो कमी आती ही है, साथ ही इससे ऑस्टियोपोरोसिस रोग का भी खतरा बढ़ जाता है। 

रजोनिवृत्ति के कारण – Cause of Menopause

1. हार्मोन स्तर में कमी (Decrease in Hormone Level)- रजोनिवृत्ति का प्रमुख कारण हार्मोन्स स्तर में प्राकृतिक रूप से कमी होना है। एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) हार्मोन मासिक धर्म को नियंत्रित करते हैं। उम्र बढ़ने के साथ-साथ ओवरी में इन हार्मोन्स का बनना कम होने लगता है। जिससे मासिक धर्म आने बंद हो जाते हैं। 40 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में हर महीने विकसित होने वाले फॉलिकल्स भी कम होने लगते हैं जो ओवरी में अंडे बनने का कारण होते हैं। बाद में इनका विकास एकदम बंद हो जाता है। परिणामस्वरूप गर्भधारण की क्षमता खत्म हो जाती है और मासिक धर्म भी बंद हो जाते हैं। 

2. सर्जिकल स्थिति(Surgical Condition) – कई कारणवश गर्भाशय को हटा दिया जाता है, हिस्टेरेक्टॉमी कहते हैं। इसलिये गर्भाशय ना होने के कारण मासिक धर्म नहीं आते। यद्यपि इस अवस्था में अंडे ओवरी से निकलते हैं मगर गर्भधारण नहीं हो सकता। एक स्थिति ऐसी होती है जिसमें ओवरी को ही निकालना पड़ता है इसे ओस्टियोरेक्टॉमी कहा जाता है। अतः गर्भधारण नहीं हो पाता और मासिक धर्म नहीं आते।

3. कुछ विशेष थेरेपी (Some Special Therapy)- कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी की वजह से भी रजोनिवृत्ति हो सकती है।

4. आनुवंशिक या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली (Genetic or Weakened Immune System)- आनुवंशिकता या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली भी रजोनिवृत्ति का कारण बनती है। इसके कारण ओवरी में प्रजनन हार्मोन के सामान्य स्तर का उत्पादन करने की क्षमता नहीं होती। इस स्थिति में 40 की उम्र से पहले ही कुछ महिलाओं में  रजोनिवृत्ति हो जाती है। इसे  प्री-मेनोपॉज (Pre-Menopause) कहा जाता है। महिलाओं में ऐसे मामले एक प्रतिशत ही होते हैं।  

रजोनिवृत्ति के लक्षण – Symptoms of Menopause 

दोस्तो, रजोनिवृत्ति के लक्षण एकदम से प्रकट नहीं होते। ये ज्यादातर पेरिमेनोपॉज की अवस्था में महसूस होने लगते हैं। ये लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं। ये महिला पर शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रभाव डालते हैं। रजोनिवृत्ति के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं – 

1. अनियमित मासिक धर्म Irregular Menstruation)- मासिक धर्म चक्र में बदलाव आने लगता है। ये अनियमित हो जाते हैं। 

2. हॉट फ्लैश महसूस होना (Feeling Hot Flashes)- यह रजोनिवृत्ति का प्रमुख कारण है। इसमें पूरे शरीर में गर्माहट बढ़ जाती है, विशेषकर चेहरे और गर्दन पर। गर्दन पर लालिमा भी देखी जा सकती है। यह गर्माहट इतनी होती है कि अचानक नींद भी खुल जाती है। रजोनिवृत्ति के बाद लगभग दो वर्ष तक इस हॉट फ़्लैश महसूस किया जाता है।  

3. रात को पसीना आना (Night Sweats)- हॉट फ़्लैश की वजह से रात को को बहुत पसीना आता है। पसीने में पूरा शरीर तर-बतर हो जाता है। नींद में पसीना आता है। 

4. वेजाइना का सूखापन (Vagina Dryness)- यद्यपि महिलाओं में वेजाइना का सूखापन कभी भी हो सकता है परन्तु रजोनिवृत्ति के समय ये एक विशेष समस्या बनती है। इसमें योनी के आसपास खुजली, चुभन, जलन महसूस होती है। सेक्स के समय बेहद दर्द होता है। यह एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के कम उत्पादन की वजह से होता है। इनका कम उत्पादन, योनि की बाहरी पतली परत को प्रभावित करता है। यह बाहरी पतली परत वेजाइना को नमी प्रदान करती है जो इन हार्मोन के कम उत्पादन की वजह से नमी प्रदान नहीं कर पाती। परिणामस्वरूप वेजाइना में सूखापन आ जाता है।

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5. वेजाइना एट्रोफी (Vagina Atrophy)- वेजाइना एट्रोफी (Vaginal Atrophy) वह अवस्था है जिसमें एस्ट्रोजेन उत्पादन में कमी होने की वजह से योनि की परत बहुत पतली हो जाती है और उनमें सूजन भी आ जाती है। यह कामेच्छा में कमी का प्रमुख कारण होती है। सेक्स करते समय भी बेहद दर्द होता है। 

6. मानसिक प्रभाव (Psychotic Effect)- रजोनिवृत्ति महिला को मानसिक तौर पर बुरी तरह प्रभावित करती है। मूड में बदलाव आना, मन का उद्विग्न (बेचैन) रहना, अवसाद (Depression), चिंता, चिड़चिड़ापन, एकदम से गुस्सा आ जाना जैसे लक्षणों के बीच महिला को जीना पड़ता है। वह किसी भी विषय पर एकाग्रचित (Concentrate) नहीं कर पाती। 

7. नींद ना आना (Sleeplessness)-  7-8 घंटे की नींद हर किसी के लिये स्वास्थ की दृष्टि से बेहद जरूरी है। परन्तु रजोनिवृत्ति में नींद न आना आम परन्तु बड़ी समस्या है। जैसा कि हमने ऊपर बताया कि रात को पसीना बहुत आता है, ऐसे में नींद नहीं आती, वैसे भी महिला बेचैन रहती है। कुल मिलाकर उसकी नींद पूरी नहीं हो पाती। जब नींद पूरी नहीं होती तो सिर में दर्द रहने लगता है और थकावट भी बहुत महसूस होती है। 

8. कामेच्छा की कमी (Lack of Libido)- रजोनिवृत्ति के समय महिला में एस्ट्रोजन नामक सेक्स हार्मोन के उत्पादन में कमी आती है। इसी कमी के कारण महिला में सेक्स के प्रति रुचि कम हो जाती है। इसका जिक्र हमने ऊपर भी किया है कि वेजाइना एट्रोफी कामेच्छा की कमी का प्रमुख कारण बनती है। इस स्थिति में महिला में कामेच्छा जागृत नहीं होती। महिलाओं में कामेच्छा पर विस्तार से जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “महिलाओं में कामेच्छा बढ़ाने के उपाय” पढ़ें। 

9. बार-बार मूत्र विसर्जन की इच्छा होना (Frequent Urge to Pass Urine)- रजोनिवृत्ति होने पर वेजाइना और मूत्राशय लचीलापन छोड़ देते हैं और पेडू की पेशियां (Pelvic Muscles) कमज़ोर होने लगती हैं। इससे महिला को बार-बार मूत्र विसर्जन की “इच्छा” होती है जबकि मूत्राशय पूरी तरह भरा नहीं होता। यहां हम स्पष्ट कर दें बार-बार मूत्र विसर्जन की “इच्छा” होना यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन नहीं है। बार-बार यूरिन आना यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का लक्षण है। 

10. यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की संभावना (Chances of Urinary Tract Infection)- जैसा कि हमने ऊपर बताया कि रजोनिवृत्ति में बार-बार मूत्र विसर्जन की “इच्छा” होना यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन नहीं है परन्तु इच्छा होने पर जल्दी-जल्दी मूत्र विसर्जन के लिये जाना, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन आमंत्रित को कर सकता है क्योंकि टॉयलेट से कीटाणु शरीर पर लगने की संभावना रहती है। वैसे भी एस्ट्रोजेन स्तर में कमी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की ओर धकेल सकती है।  

11. बालों, त्वचा और अन्य ऊतकों में परिवर्तन (Changes in Hair, Skin, and Other Tissues)- उम्र बढ़ने के साथ-साथ बालों, त्वचा में परिवर्तन होता रहता है। यह हम सब अनुभव करते हैं। रजोनिवृत्ति में वेजाइना और मूत्रमार्ग की त्वचा का ढीला होना इसी परिवर्तन का परिणाम है। फैट टिश्यूज़ और कोलाजन की वजह से त्वचा ड्राई और पतली हो जाती है। एस्ट्रोजन स्तर कम होने पर बालों के टूटना और रूखेपन की समस्या होने लगती है। 

12. अन्य (Others)- अन्य लक्षणों में हड्डियों का कमजोर हो जाना खराब वाला कोलेस्ट्रॉल LDL का बढ़ जाना या हृदय संबंधी समस्या होना रजोनिवृत्ति के लक्षण हो सकते हैं।

रजोनिवृत्ति के लिए परीक्षण – Test for Menopause

1. मासिक धर्म बंद हो जाने पर रजोनिवृत्ति मान लिया जाता है। समय से पहले किसी के मासिक धर्म बंद हो जाते हैं। इन सब के लिये डॉक्टर ब्लड सेंपल लेकर फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (FSH), एस्ट्रोजन और थायरॉइड-स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (TSH) के स्तर की जांच करते हैं। यदि FSH लेवल बढ़ता है और एस्ट्राडियोल का लेवल कम होता है तो यह मेनोपॉज होता है। इसके अतिरिक्त TSH से संबंधित अंडरएक्टिव थायरॉयड (हायपोथायरायडिज्म) भी मेनोपॉज (Menopause) के सामान ही लक्षण दे सकता है। 

2. इसके अतिरिक्त निम्नलिखित टैस्ट भी किये जा सकते हैं –

(i)  थॉयरायड फंक्शन टैस्ट

(ii) ब्लड लिपिड प्रोफाइल

(iii) लिवर फंक्शन टैस्ट

(iv) किडनी फंक्शन टैस्ट

(v) प्रोजेस्टेरोन, प्रोलैक्टीन, एस्ट्राडायल और कोरियोनिक गोनाडोट्रोपीन (एचसीजी) टैस्ट आदि।

रजोनिवृत्ति का उपचार – Treatment of Menopause 

चूंकि रजोनिवृत्ति महिलाओं में एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसीलिए इसके उपचार की जरूरत नहीं होती। हां, गंभीर लक्षणों के चलते निम्नलिखित उपचार किये जा सकते हैं – 

1. हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) – हॉट फ्लैश, रात में पसीना आना, वेजाइना का सूखापन, ऑस्टियोपोरोसीस आदि समस्या को हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के जरिये संभाला जा सकता है। हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी के अंतर्गत या तो सिर्फ एस्ट्रोजेन या एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टिन को मिलाकर टेबलेट, पैचे या इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है। इस थेरेपी के साइड इफैक्ट भी होते हैं, जैसे ब्रैस्ट कैंसर तथा हृदय रोग का जोखिम। 

2. एस्ट्रोजन क्रीम (Estrogen Cream)- योनि के सूखेपन के लिये डॉक्टर एस्ट्रोजेन क्रीम का उपयोग करने की सलाह दे सकते हैं। इसका हफ्ते में दो या तीन बार इस्तेमाल करना चाहिये।

3. फाइटोएस्ट्रोजेन (Phytoestrogens)- योनि के सूखेपन, हॉट फ्लैश और ऑस्टियोपोरोसिस के लिये डॉक्टर फाइटोएस्ट्रोजेन लेने को कह सकते हैं। ये प्राकृतिक रूप से खाद्य पदार्थों जैसे फल और सब्जियों में होते हैं। 

4. दवाईयां (Medicines)- डॉक्टर, अनिद्रा के लिये स्लीप मेडिकेशन, सूखी आंख के लिये ट्रॉपिकल लुब्रिकेंट और अंटीइंफ्लैमटोरी एजेन्ट्स, बाल झड़ने से रोकने के लिये ट्रॉपिकल मिनोऑक्सिडी, यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की समस्या से राहत पाने के लिये प्रोफाइलैक्टिक एंटीबायोटिक्स दे सकते हैं। 

रजोनिवृत्ति के बाद यौन संबंध – Sex After Menopause 

जैसा कि हमने ऊपर बताया है कि एस्ट्रोजेन सेक्स हार्मोन के कम उत्पादन के कारण महिला में सेक्स के प्रति रुचि कम हो जाती है। फिर योनि का सूखापन यौन संबंध में सबसे बड़ी रुकावट है। वेजाइना एट्रोफी कामेच्छा की कमी का सबसे कारण है। ऐसे में महिलाऐं यौन संबंध सुख से वंचित रह जाती हैं। डॉक्टर और  स्वास्थ्य विशेषज्ञ, डॉ। साराह जार्विस के अनुसार स्त्रियों को अपनी झिझक छोड़ कर कर मदद के लिये कोशिश करनी चाहिये। क्योंकि इन समस्याओं के हल हैं। स्त्रियों को पहले खुद की मदद करनी चाहिये। योनि के रूखेपन को दूर करके यौन क्रिया को आसान और सुखदायी बनाया जा सकता है। इसके लिये निम्नलिखित उपाय अपना सकती हैं। 

1. गुनगुना पानी या साबुन रहित क्लींजर का उपयोग करें।

2. साबुन, नहाने के तेल और शावर जेल का प्राइवेट पार्ट्स पर इस्तेमाल ना करें। इनसे रूखापन बढ़ता है। 

3. केवाई जैली(KY Jelly), एस्ट्रोग्लाइड (Astroglide), सिल्क, सेंसेल (senselle) या रेप्लेन्स (replens) के जैसे चिकने पदार्थों का इस्तेमाल करें। ये मेडिकल स्टोर से बिना पर्चे के मिल जाते हैं। 

4. एचआरटी/एस्ट्रोजन  जैसा कि हमने बताया कि डॉक्टर हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी से उपचार करते हैं ताकि योनि के सूखेपन को कम किया जा सके। यदि कोई महिला इसे नहीं लेना चाहती तो वह एस्ट्रोजन क्रीम को केवल अपनी योनि पर लगा सकती हैं, ताकि प्राकृतिक चिकनाई बनी रहे। एस्ट्रोजन क्रीम ऍप्लिकेटर की मदद से लगाई जाती है।

5. एस्ट्रोजन स्रावित करने वाला योनि का छल्ला – यह एक बार लगाने पर अपनी जगह पर तीन महीने तक रहता है।

6. पेसेरीज (pessaries) – ये छोटी गोलियां होती हैं जो ऍप्लिकेटर के जरिये अंदर डाली जाती हैं। 

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रजोनिवृत्ति के लक्षणों के प्रभाव को कम करने के घरेलू उपाय – Home remedies to reduce the effects of menopausal symptoms 

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि रजोनिवृत्ति एक प्राकृतिक प्रक्रिया है ना कि कोई रोग। इसलिये इसका कोई उपचार नहीं है। परन्तु इसके लक्षणों के प्रभाव को जीवनशैली, आहार और वैकल्पिक दवाओं के जरिये कम किया जा सकता है। डॉक्टरी उपचार के बारे में हम ऊपर बता चुके हैं। अब बताते हैं आपको कुछ निम्नलिखित उपाय घरेलू उपचार जिनके माध्यम से जीवनशैली और खानपान में बदलाव करके रजोनिवृत्ति के बाद अपने जीवन को सरल और खुशनुमा बना सकती हैं – 

1. शरीर को ठंडा रखें (Keep Body Cool)- रजोनिवृत्ति के बाद हॉट फ़्लैश के चलते शरीर गर्म रहता है। इसे ठंडा रखने की कोशिश करें। कपड़े भी हल्के और आरामदायक पहनें। अपने बेडरूम को भी कूलर/एसी के जरिये ठंडा रखें। 

2. व्यायाम करें (Exercise)- प्रतिदिन सुबह 30 मिनट तक व्यायाम करें। इससे सारे दिन आप में स्फूर्ति बनी रहेगी और रात को नींद भी अच्छी आयेगी। इसके लिये आप मॉर्निंग वॉक भी कर सकती हैं। यह भी व्यायाम का हिस्सा है। व्यायाम करने से आपका वजन भी कंट्रोल में रहेगा। व्यायाम करने से डायबिटीज, बढ़ता कोलेस्ट्रोल, उच्च रक्तचाप, ऑस्टियोपरोसिस और हृदय रोग आदि की समस्या से भी राहत मिलेगी। 

3. अवसाद/तनाव को कंट्रोल करें(Control Depression/Stress) – इसके लिये सबसे जरूरी है कि आप अकेली नहीं है। आपको यह समझना होगा कि आपके साथ आपका परिवार है आपके दोस्त हैं। आप इन सब से अपने मन की बात कह सकती हैं फिर भी अकेलेपन की फीलिंग आती है तो अच्छी पुस्तकें पढ़ें, अपने को सकारात्मक कामों में व्यस्त रखें। इससे आप अवसाद/तनाव से छुटकारा पा सकती हैं। फिर भी आप समस्या समझती हैं तो मनोचिकित्सक या थेरेपिस्ट से परामर्श करें। 

4. मन को शांत करें (Calm your Mind)- रजोनिवृत्ति में मन का उद्विग्न (बेचैन) रहना सबसे खतरनाक लक्षण होता है। मन अशांत रहने से उदासी, तनाव, अवसाद, चिड़चिड़ापन, गुस्सा आना, रक्तचाप का बढ़ना आदि जैसी समस्याऐं होती हैं। इन सब से मुक्ति पाने के लिये मेडिटेशन करें। मन को शांत करने के लिये मेडिटेशन सबसे उत्तम उपाय है। 

5.  सिगरेट और शराब को अवॉइड करें (Avoid Cigarettes and Alcohol)- रजोनिवृत्ति में सिगरेट और शराब का सेवन, इसके लक्षणों की गंभीरता को बढ़ा सकते हैं। इसलिये इनको अवॉइड करें। 

6. आपका आहार (Your Diet)- शारीरिक और मानसिक स्वास्थ के लिये अपने आहार का निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें – 

(i)  प्रतिदिन आपके आहार में 3 से 5 भाग फल और 2 से 4 कप सब्जियां होनी चाहियें।  

(ii) आपका भोजन पौष्टिक होना चाहिये, इसमें प्राकृतिक पूरक (Natural Supplement) वाले खाद्य पदार्थ होने चाहियें जैसे सोया, अलसी, मेलाटोनीन,  विटामिन-ई आदि।

(iii) ऑस्टियोपोरोसीस, अनिद्रा और थकान से राहत पाने के लिये डॉक्टर की सलाह पर कैल्शियम, विटामिन-डी और मैग्निशियम के सप्लीमेंट लें।

(iv) कैल्शियम से समृद्ध खाद्य पदार्थों जैसे तिल, सोयाबीन, रागी का उपयोग करें परन्तु जब आप आयरन युक्त खाद्य पदार्थ ले रहे हों तो कैल्शियम और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को अवॉइड करें क्योंकि ये दोनों ही आयरन के अवशोषण को कम कर देते हैं। 

(v) अपने भोजन में आयरन युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें जैसे पत्तेदार हरी सब्जियां, काली किशमिश आदि। विटामिन-सी से भरपूर नींबू और संतरे का जूस जरूर लें। 

(vi) दूध, दही, योगार्ट, पनीर आदि डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन करें। 

(vii) सेचुरेटेड फैट, ऑयली और अधिक शुगर वाले खाद्य पदार्थों को अवॉइड करें, इनसे मोटापा बढ़ता है। 

Conclusion – 

दोस्तो, आज के आर्टिकल में हमने आपको रजोनिवृत्ति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। पहले स्पष्टीकरण दिया, फिर रजोनिवृत्ति क्या होती है?, रजोनिवृत्ति की उम्र, रजोनिवृत्ति के कारण, रजोनिवृत्ति के लक्षण, रजोनिवृत्ति के लिये परीक्षण, रजोनिवृत्ति का उपचार और रजोनिवृत्ति के बाद यौन संबंध, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस आर्टिकल के माध्यम से रजोनिवृत्ति के लक्षणों के प्रभाव को कम करने के घरेलू उपाय भी बताये। आशा है आपको ये आर्टिकल अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस आर्टिकल से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो आर्टिकल के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह आर्टिकल आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह आर्टिकल केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

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