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दोस्तो, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग पर। दोस्तो, पेट की अनेक बीमारियां होती हैं जिनको उदर (पेट) रोग कहा जाता है। इनमें कब्ज, गैस, पेट में सूजन, अल्सर, पेट का कैंसर आदि प्रमुख हैं। पेट की कुछ बीमारियां, पेट के अन्दर शरीर के अंगों से जुड़ी होती हैं जैसे लिवर खराब हो जाना, किडनी खराब हो जाना, पित्ताशय या गुर्दे में पथरी आदि। इसी तरह पेट की एक और बीमारी होती है जिसमें कमजोर मांसपेशियों को भेदकर पेट के अंग, विशेषकर आंतें बाहर आने लगते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं हर्निया की जिसका उपचार सर्जरी होता है, परन्तु यदि इसके लक्षणों को जल्दी पहचान लिया जाये तो, घरेलू उपायों से भी इसका उपचार किया जा सकता है। दोस्तो, यही है हमारा आज का टॉपिक “हर्निया से छुटकारा पाने के घरेलू  उपाय”। देसी हैल्थ क्लब इस लेख के माध्यम से आज आपको हर्निया के बारे में विस्तार से जानकारी देगा और यह भी बतायेगा कि हर्निया के उपचार के लिये घरेलू उपाय क्या हैं। तो, सबसे पहले जानते हैं कि हर्निया क्या है और यह कितने प्रकार का होता है। फिर इसके बाद बाकी बिंदुओं पर जानकारी देंगे। 

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हर्निया से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय
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हर्निया क्या है? – What is Hernia?

दोस्तो, हर्निया पेट से जुड़ी एक बीमारी है जो लगभग दो प्रतिशत लोगों में होती है। जब पेट के अन्दर की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, इनमें छिद्र हो जाते हैं  तो पेट के अंग, सामान्यतः आंतें इन छिद्रों में से होकर बाहर निकलने लगते हैं। इस स्थिति को ही हर्निया कहा जाता है। वैसे तो यह शरीर में कहीं भी हो सकता है लेकिन इस स्थिति में सामान्यतः नाभि के इर्दगिर्द, कमर के आसपास, पेट के नीचे जांघ, अंडकोष, या पेट के जोड़ वाले हिस्से (इनग्वायनल रीजन/ग्राईन) या पेट में पहले से हुऐ ऑपरेशन की जगह, प्रभावित होते हैं। प्रभावित स्थान पर सूजन हो जाती है और ऐसा लगता है कि वह स्थान गुब्बारे की तरह फूला हुआ हो। इस वजह से कभी हल्का या तेज दर्द हो जाता है, खांसने, झुकने, चलने, वजन उठाने में भी दर्द होता है। यहां तक कि मल-मूत्र त्यागने में भी तकलीफ होती है। हर्निया किसी भी आयु में, या जन्म से, पुरुष, महिला किसी को भी हो सकता है। इस बीमारी का शुरुआत में ही इलाज करा लेना चाहिये अन्यथा यह भविष्य में जानलेवा साबित हो सकती है।

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हर्निया के प्रकार – Types of Hernia

दोस्तो, हर्निया दो ही प्रकार का होता है – हाइटल और अम्बिलिकल परन्तु विशेष स्थितियों में इसके कई रूप देखने को मिलते हैं। हम सभी के बारे में बता रहे हैं। विवरण निम्न प्रकार है –

1. हाइटल हर्निया (Hiatal Hernia)- डायाफ्राम, मांसपेशियों से बनी हुई पतली दीवार होती है जो छाती और पेट को अलग करती है।  इसमें एक छिद्र होता है जिसे हाइटस कहते हैं। ग्रास (आहार) नली (Esophagus) नली गले के नीचे से शुरू होकर हाइटस के अन्दर से निकलकर पेट तक पहुंचती है। जब पेट का कोई छोटा सा हिस्सा हाइटस से निकल कर छाती तक पहुंचता है तब भोजन भी वापिस आहार नली में जाने लगता है। परिणामस्वरूप छाती में दर्द और जलन होने लगते हैं और पेट में एसिडिटी। इसी अवस्था को हाइटल हर्निया कहा जाता है जिसमें पेट का हिस्सा हाइटिस के जरिये छाती तक पहुंचता है। यह हर्निया सामान्यतः 50 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों में होता है या बच्चों में इसके लक्षण तब समय दिखते हैं, जब उनमें जन्म से ही कोई विशेष दोष रहा हो। दोस्तो, हाइटल हर्निया भी दो प्रकार का होता है, जिनका विवरण निम्न प्रकार है – 

(i) स्लाइडिंग – यह सबसे सामान्य प्रकार का है और 80 प्रतिशत मामले इसी के होते हैं। इस प्रकार के हर्निया में पेट और ग्रास नली का नीचे का हिस्सा डायाफ्राम के जरिये गुजरकर छाती के ऊपर, नीचे, अंदर और बाहर स्लाइड करता है यानी खिसकता है। 

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(ii) पैराएसोफेगल – इसे एक खतरनाक हर्निया माना जाता है। इसके मामले 5 से 15 प्रतिशत होते हैं। इसे रोलिंग हर्निया भी कहा जाता है। इसमें ग्रासनली और पेट उसी स्थिति में होते हैं जिसमें होने चाहियें परन्तु पेट का एक हिस्सा, डायाफ्राम के छिद्र के जरिये ऊपर धकेला जाता है जिससे ग्रासनली पर दबाव पड़ता है। 

2. अम्बिलिकल हर्निया (Umbilical Hernia)- इस प्रकार का हर्निया नवजात शिशुओं में होता है। इसमें नाभि के पीछे पेट की दीवार प्रभावित होती है और नाभि बाहर की ओर अण्डाकार रूप में उभर आती है और नाभि के आसपास सूजन भी आ जाती है।  इसका उभार उस समय अधिक देखा जा सकता है जब बच्चा रोता है या उसको खांसी उठती है। अधिकतर इस प्रकार का हर्निया एक या दो वर्ष में अपने आप ही खत्म हो जाता है। और यदि यह अपने आप ठीक ना हो तो बचपन में या व्यस्क होने पर सर्जरी के द्वारा इसे ठीक किया जा सकता है। 

3. इनगुइनल हर्निया (Inguinal Hernia)- इस प्रकार का हर्निया महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक होता है। यह हर्निया पेट के निचले भाग और ग्रोइन एरिया को प्रभावित करता है। इस प्रकार के हर्निया में कमजोर और नर्म टिश्यूज़ पेट की निचली मांसपेशियों से निकल कर पेट के निचले हिस्से और जांघों के बीच में जाकर फैलने लगते हैं। यद्यपि यह हर्निया खतरनाक या जानलेवा नहीं होता परन्तु इसके लक्षण परेशान जरूर करते हैं। इसमें झुकते, खांसते या एक्‍सरसाइज करते समय शरीर में दर्द होना, पेट और जांघ में दर्द, अंडकोष में सूजन, जोड़ों में दर्द, छाती में जलन आदि लक्षण प्रकट होते हैं। सामान्य सर्जरी द्वारा इससे छुटकारा पाया जा सकता है।

4. स्पोर्ट्स हर्निया (Sports Hernia)- यह अधिकतर खिलाड़ियों में होने वाला हर्निया है। पहली नजर में यह इनगुइनल हर्निया जैसा लगता है क्योंकि इसमें भी पेट का निचला भाग प्रभावित होता है। इसके अतिरिक्त जांघ के बीच का हिस्सा भी प्रभावित होता है। इस प्रकार का हर्निया किसी नर्म टिश्यू के फटने से, पेट के निचले हिस्से में और ग्रोइन एरिया तनाव के कारण होता है। सामान्य हर्निया के समान इसमें भी पेट या कमर के आसपास दर्द उठता है लेकिन इसमें कहीं सूजन नहीं होती है। यह एक राहत की बात है। वस्तुतः भाग दौड़, उछलना, कूदना, खेल के मैदान में अति उत्साह के साथ शारीरिक गतिविधि के कारण खिलाड़ियों की मांसपेशियां खिंचती रहती हैं, टिश्यूज़ फटते रहते हैं। खिलाड़ियों के मामले में यह सामान्य बात है इसलिये यह जरूरी नहीं कि मांसपेशियां का खिंचना या टिश्यूज़ का फटना, हर्निया ही हो। अतः डॉक्टर इस स्थिति को “एथलेटिक पुबल्गिया” का नाम देते हैं। खेल से कुछ दिनों का ब्रेक और फिजिशियन के टिप्स फॉलो करने से और आराम करने से ऐसी समस्याओं खिलाड़ियों को इससे छुटकारा मिल जाता है। 

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5. इंसिज़नल हर्निया (Incisional Hernia)- इस प्रकार के हर्निया का आधार पेट की पहले हुई सर्जरी की जटिलता का परिणाम होता है। अर्थात् पेट की हुई सर्जरी के बाद कुछ जटिलताऐं देखने को मिलती हैं। या सर्जरी में कुछ कमी रह गई हो या सर्जरी की खराब तकनीक हो, तब इंसिज़नल हर्निया की स्थिति उत्पन्न होती है। या सबसे बड़ी बात यह है कि सब कुछ ठीक ठाक है मगर सर्जरी का घाव पूरी तरह नहीं भरा हो तो आंतें चीरे के निशान या आसपास के कमजोर टिश्यूज़ के जरिये बाहर निकल आती हैं। सर्जिकल घाव भरने की वजह कमजोरी होती है, जो हेमेटोमा, सेरोमा या संक्रमण के कारण बनती है।

6. फेमोरल हर्निया (Femoral Hernia)- हर्निया का यह रूप पुरुषों की तुलना में महिलाओं में चार गुना अधिक देखने को मिलता है। परन्तु एक सच्चाई यह भी है कि सभी प्रकार के हर्निया की तुलना में फेमोरल हर्निया के केवल तीन प्रतिशत ही मामले होते हैं। यह हर्निया पेट के नीचे  ग्रोइन एरिया के पास जांघ के ऊपरी हिस्से को प्रभावित करता है। यह तब बनता है जब आंत का कोई हिस्सा या फैटी टिश्यू जांघ और पेट के बीच में से निकलता है, जांघ के अंदर के हिस्से के ऊपर।  इसकी वजह से खड़े होने पर, किसी भारी वस्तु उठाने पर और ज्यादा मेहनत का काम करने पर तेज दर्द होता है। कई मामलों में यह नितम्ब की हड्डी के पास होता है जिससे नितम्ब में दर्द रहने लगता है। जब आंतों में खून के प्रवाह में रुकावट आने लगे तो यह इस हर्निया का भयंकर रूप होता है जिसे दमन (Strangulation) कहा जाता है। पेट के नीचे अचानक दर्द, बेचैनी, उल्टी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिये। Strangulation की स्थिति को मेडिकल इमरजेंसी कहा जाता है जिसमें इमरजेंसी ऑपरेशन करके मरीज की जान बचाई जाती है।

हर्निया के कारण – Cause of Hernia

दोस्तो, हर्निया होने के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं –

1. कब्ज रहना। कब्ज की समस्या होने की वजह से सुबह के समय प्रतिदिन पेट साफ नहीं हो पाता। मल त्याग के लिये अधिक जोर लगाना पड़ता है। 

2. पाचन तंत्र का कमजोर होना।

3. मूत्र विसर्जन के लिये अधिक जोर लगाना। मूत्र मार्ग में रुकावट या कोई अन्य समस्या होना।

4. भोजन से शरीर के लिये आवश्यक प्रोटीन, विटामिन और खनिज ना मिल पाना।

5. लंबे समय तक ज्यादा भारी वजन उठाना। 

6. भारी एक्सरसाइज करना। 

7. पुरानी खांसी, टीबी, अस्थमा की समस्या।

8. फेफड़ों की समस्या।

9. पेट में तरल पदार्थ का जमा होना (Ascites)।

10. लिवर की गंभीर समस्या।

11. वजन बढ़ना।

12. मांसपेशियों और ऊतक का कमजोर होना।

13. ज्यादा धूम्रपान करना।

15. तनाव रहना

16. गर्भावस्था।

17. वृद्धावस्था।

18. अनुवंशिक या जन्मजात। 

हर्निया के लक्षण – Symptoms of Hernia

हर्निया में कई बार आरंभिक लक्षण भी दिखाई नहीं देते परन्तु सामान्यतः इसके निम्नलिखित लक्षण होते हैं –

1. सुबह पेट साफ़ ना होना।

2. पेट के साइड में या नीचे के भाग में दर्द होना।

3. पेट के साइड में या नीचे सूजन रहना।

4. खांसते हुऐ सूजन दिखाई देना।

5. छाती में जलन और दर्द होना।

6. छाती पर सूजन होना।

7. भोजन, पानी निगलने में परेशानी।

8. थकावट, कमजोरी रहना।

9. लेटने पर सूजन का अंदर चले जाना।

10. असमान्य रूप से यानी जल्दी-जल्दी डकार आना।

हर्निया का परीक्षण – Test of Hernia

1. शिशुओं और बच्चों के हर्निया परीक्षण में ज्यादा दिक्कत आती है क्योंकि इनमें हर्निया के लक्षण आसानी से नहीं दिखाई देते। इसलिये इनका परीक्षण उस समय किया जाता है जब वे दर्द की वजह से रोते हैं या उनको खांसी उठती है।

2. बड़ों के मामले में शारीरिक जांच की जाती है। इसमें पेट और कमर में उभार की जांच की जाती है। यह उभार व्यक्ति के खांसने या खिंचाव के कारण बड़ा हो जाता है।

3. अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन के द्वारा भी हर्निया का पता लगाया जाता है।

4. पेट का एक्स-रे भी कराया जा सकता है इससे आंतों में ब्लॉकेज का पता चल जाता है। 

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हर्निया का उपचार – Hernia Treatment

दोस्तो, ऐलोपेथी चिकित्सा पद्धति में हर्निया के उपचार के लिये कोई दवा नहीं बनी है। इसका उपचार केवल सर्जरी ही है। इस बारे में इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली के डॉक्टर डॉ।अरुण प्रसाद, वरिष्ठ सलाहकार, जनरल, जीआई और बैरिएट्रिक सर्जन का कहना है कि “आपकी मांसपेशियां जो खराब हो चुकी होती हैं उनको दुबारा नहीं बनाया जा सकता है। हां ये हो सकता है कि जो छेद हो गया है उसके ऊपर पैच लगा सकते हैं और ये सिर्फ सर्जरी से ही हो सकता है”। लेकिन कुछ घरेलू नुस्खे इस प्रकार के हैं जो हर्निया से राहत दिला सकते हैं। इनका जिक्र हम आगे करेंगे। पहले जानते हैं हर्निया का उपचार के लिये होने वाली सर्जरी के बारे में।

हर्निया की सर्जरी – Surgery of Hernia 

दोस्तो, हर्निया की सर्जरी निम्नलिखित दो प्रकार से की जाती है, दोनों ही सर्जरी का मकसद शरीर के बाहर निकले हुऐ अंगों को वापस पेट में डालना और छिद्रों को पैच लगाकर बंद करने के लिए मेश (जाली) लगाना होता है –

1. ओपन सर्जरी (open surgery)- ओपन सर्जरी में मरीज को जनरल एनेस्थीसिया देकर बेहोश किया जाता है। इस प्रक्रिया में  पेट में बड़ा सा कट लगाया जाता है जिसमें ब्लीडिंग काफी होती है और दर्द भी। सर्जरी के दौरान दो मांसपेशियों के बीच मेश (जाली) लगाई जाती है।  पहले मांसपेशी की परत होती है, फिर जाली और फिर मांसपेशी की परत। जाली आंत को टच नहीं करती। इस सर्जरी के बाद मरीज को कई दिन तक अस्पताल में ही रखा जाता है। अस्पताल से डिस्चार्ज मिलने के बाद मरीज को 6 महीने आराम करने को कहा जाता है यानी 6 महीने तक वह कोई भी शारीरिक गतिविधि नहीं कर सकता। 

2. दूरबीन द्वारा सर्जरी (Surgery By Binoculars)- इसमें भी मरीज को जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है और बहुत ही छोटा कट आता है जिससे ब्लीडिंग बहुत ही कम होती है और दर्द भी कम होता है। इस प्रक्रिया में जाली छेद के नीचे लगाई जाती है  जिससे हर्निया के दुबारा होने की संभावना नहीं रहती। इस सर्जरी के बाद मरीज को उसी दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है और 10 से 12 दिन बाद वह अपने काम को पहले की तरह कर पाने में समर्थ होता है। 

हर्निया से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय – Home Remedies of Hernia

दोस्तो, जैसा कि हमने ऊपर बताया कि ऐलोपेथी चिकित्सा पद्धति में हर्निया के उपचार के लिये कोई दवा नहीं है। इसका उपचार केवल सर्जरी ही है। लेकिन, कुछ घरेलू नुस्खे इस प्रकार के हैं जिनके उपयोग से हर्निया से छुटकारा मिल सकता है। इनका विवरण निम्न प्रकार है –

1. त्रिफला चूर्ण (Triphala Churna)- दोस्तो, चूंकि हर्निया उदर (पेट) रोग है इसलिये यह सबसे महत्वपूर्ण है कि मरीज का पेट प्रतिदिन सुबह प्राकृतिक रूप से साफ हो। इसके लिये हरड़, बहेड़ा और आँवला से बना त्रिफला चूर्ण एक वरदान है। इसलिये प्रतिदिन रात को सोने से पहले आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने दूध के साथ लें। दूध नहीं तो गुनगुने पानी से भी यह चूर्ण ले सकते हैं।

2. बहेड़ा (Bahera)- आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में बहेड़ा को हर्निया के उपचार में अत्यंत प्रभावशाली उपाय माना जाता है। बहेड़ा का छिलका उतार कर, बहेड़ा के अच्छी तरह पीस कर पाउडर बना लें। इस पाउडर में जामुन का सिरका मिला लें। इसको हर्निया प्रभावित स्थान पर एक एक या डेड़ घंटा लगायें। यह उपचार केवल सामान्य हर्निया के लिये है, बड़े, गंभीर या अम्बिलिकल हर्निया के लिये नहीं।

3. अजवाइन और पुदीना (Celery and Mint)- अजवाइन के रस की 20 बूंदें और पुदीना के रस की भी 20 बूंदें मिलाकर पीने से आराम लग जायेगा। अजवाइन पर विस्तार से जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “अजवाइन के फायदे” पढ़ें।  

4. अदरक (Garlic)- अदरक एसिडिटी और कब्ज की समस्या से छुटकारा दिलाने अत्यंत लाभदायक होती है। यह हर्निया की समस्या से राहत दिलाने मददगार मानी जाती है। एक कप पानी में थोड़ी सी अदरक कूटकर पांच मिनट उबाल लें। इसको छानकर इसमें आधा चम्मच शहद मिलाकर चाय की तरह पीयें। इसे दिन में दो बार पी सकते हैं। 

5. दालचीनी (Cinnamon)- पेट की समस्याओं से राहत पाने के लिये दालचीनी अच्छा विकल्प है। कब्ज, एसिडिटी, पेट फूलना, पेट दर्द, डकार आदि के उपचार में दालचीनी लाभदायक होती है। हर्निया के मामले में थोड़ी सी दालचीनी का पाउडर एक कप गर्म पानी में उबालकर चाय की तरह पीयें। दिन में तीन बार पी सकते हैं। भोजन में भी इसका इस्तेमाल करें। दालचीनी पर विस्तार से जानकारी के लिये हमारा पिछला आर्टिकल “दालचीनी के फायदे और नुकसान” पढ़ें। 

6. कैमोमाइल चाय (Chamomile Tea)– कैमोमाइल को सूजन विरोधी माना जाता है क्योंकि इसमें एंटीइंफ्लामेटरी गुण होते हैं। यह प्राकृतिक रूप से सूजन को कम करती है। यह पेट दर्द और पेट में जलन को भी कम करती है, साथ ही पाचन क्रिया को दुरुस्त कर मांसपेशियों को आराम देती है। एक कप पानी में कैमोमाइल को उबालकर, छानकर पीयें। आप चाहें तो इसमें आधा चम्मच शहद मिला सकते हैं। इसे दिन में तीन या चार बार पी सकते हैं।   

7. सेब का सिरका (Apple Vinegar)- सेब का सिरका स्वयं में एक  शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो अनेक बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है। यह हर्निया के लक्षणों को भी कम करने में मदद करता है। यह पेट की जलन, एसिडिटी और कब्ज में राहत पहुंचाता है। हर्निया के प्रभाव को कम करने के लिये एक कप गर्म पानी एक चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पीयें। 

8. एलोवेरा जूस  (Aloe Vera Juice)- एलोवेरा प्रकृति का वरदान है जिसमें  अनेक औषधीय गुण मौजूद होते हैं। एलोवेरा का जूस हाइटल हर्निया के उपचार में बेहद फायदेमंद होता है। इससे आंतों की सफाई अच्छी तरह हो जाती है। पेट के निचले हिस्से में होने वाले दर्द से राहत मिलती है। यह पेट दर्द, जलन और सूजन को कम करता है। एक कप में दो चम्मच एलोवेरा डालकर जूस बना लें।  प्रतिदिन खाना खाने से बीस मिनट पहले इस जूस को पीयें। 

9. बेकिंग सोडा (Baking Soda)- बेकिंग सोडा एसिडिटी, पेट की जलन और पेट दर्द से राहत दिलाने का एक अच्छा विकल्प है। इसमें प्राकृतिक रूप से एंटासीट होता है। इसका उपयोग अधिक नहीं करना चाहिये, जब जरूरत हो केवल तभी इसका सेवन करें। एक गिलास पानी में आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर तुरंत पी लें।  

10. बथुआ (Bathua)- बथुआ को उबाल कर छाछ या दही में फेंटकर रायता बना लें। इसमें भुना हुआ जीरा और स्वादानुसार सेंधा नमक मिलाकर सेवन भोजन के साथ इस्तेमाल करें। चूंकि बथुआ की तासीर गर्म होती है इसलिये इसका सेवन कम करना चाहिये।    

11. लाल चंदन (Red Sandalwood)- लाल चंदन, खस, मुलैठी, कमल, नीलकमल को दूध में पीसककर हर्निया प्रभावित क्षेत्र पर लेप करें। इससे, दर्द, जलन और सूजन में आराम मिलेगा। 

12. रोहिणी (Rohini)- रोहिणी की छाल का काढ़ा 28 मि।ली। की मात्रा में, दिन में तीन बार पीयें। 

13. गोरखमुंडी (Gorakhmundi)- इस फल में ऐसे गुण होते हैं जो हर्निया से लड़कर राहत पहुंचाते हैं। इस फल के बराबर की मात्रा में मूसली, शतावरी, भांगर मिलाकर पाउडर तैयार कर लें। इस पाउडर को तीन ग्राम मात्रा में लेकर पानी के साथ सेवन करें। जल्द ही हर्निया से राहत मिलेगी।

14. गर्म पानी (Hot Water)- प्रतिदिन सुबह उठते ही एक गिलास गर्म पानी पीयें। इससे डायफ्राम को नीचे आने में मदद मिलेगी और इसके साथ ही मांसपेशियों को भी आराम मिलेगा।

15. योगासन (Yoga Asanas)- हर्निया से छुटकारा पाने के लिये योग गुरु की देखरेख में उत्कटासन करें, इससे डायाफ्राम और मांसपेशियों को मजबूती मिलेगी। यह दर्द और असहजता को भी कम करेगा। ऐसे योगासन ना करें जिनसे पेट के निचले भाग पर दबाव पड़े  जैसे धनुरासन, भुजंगासन, सेतुबंधासन। 

हर्निया में क्या खाना चाहिये? – What to Eat in Hernia?

दोस्तो, हर्निया के मरीज को ऐसा भोजन करना चाहिये जो प्रोटीन ज्यादा मिले, विटामिन और खनिज पदार्थों से भरपूर हो, कम एसिड वाला हो और जिसमें फाइबर की मात्रा अधिक हो। निम्न्लिखित खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करना चाहिये –

पत्ते वाला सलाद, गाजर, पालक, शतावरी, मशरूम,कद्दू, आलू, ब्रोकली, सेब, केला, नाशपाती, कीवी, अंजीर, ब्राउन चावल, पुराना चावल, पॉपकॉर्न, चना, मसूर, मूंग, अरहर की दाल, परवल, बैंगन, अदरक, सहजन, लहसुन, जिमीकंद, शहद। 

क्या नहीं खाना चाहिये? – What Should not Be Eaten?

निम्नलिखित पदार्थों से परहेज करना चाहिये –

तीखे, तेज मसालेदार भोजन, तले, भुने हुए खाद्य पदार्थ, सोडियम में उच्च खाद्य पदार्थ, मांस, उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थ, लहसुन, प्याज, अल्कोहल, कैफीन युक्त पेय, चॉक्लेट, कोल्ड ड्रिंक्स, फास्ट फूड, उड़द, दही, पोई का साग, नया चावल,  सी-फूड, ज्यादा मीठा भोजन। 

Conclusion – 

दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको हर्निया से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। हर्निया क्या है, हर्निया के प्रकार, हर्निया के कारण, हर्निया के लक्षण, हर्निया का परीक्षण, हर्निया का उपचार, हर्निया की सर्जरी, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया। देसी हैल्थ क्लब ने इस लेख के माध्यम से हर्निया से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय बताये और हर्निया में क्या खाना चाहिये और क्या नहीं खाना चाहिये इनके विषय में भी बताया। आशा है आपको ये लेख अवश्य पसन्द आयेगा। 

दोस्तो, इस लेख से संबंधित यदि आपके मन में कोई शंका है, कोई प्रश्न है तो लेख के अंत में, Comment box में, comment करके अवश्य बताइये ताकि हम आपकी शंका का समाधान कर सकें और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकें। और यह भी बताइये कि यह लेख आपको कैसा लगा। आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और  सगे – सम्बन्धियों के साथ भी शेयर कीजिये ताकि सभी इसका लाभ उठा सकें। दोस्तो, आप अपनी टिप्पणियां (Comments), सुझाव, राय कृपया अवश्य भेजिये ताकि हमारा मनोबल बढ़ सके। और हम आपके लिए ऐसे ही Health-Related Topic लाते रहें। धन्यवाद।

Disclaimer – यह लेख केवल जानकारी मात्र है। किसी भी प्रकार की हानि के लिये ब्लॉगर/लेखक उत्तरदायी नहीं है। कृपया डॉक्टर/विशेषज्ञ से सलाह ले लें।

Summary
हर्निया से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय
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हर्निया से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय
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दोस्तो, आज के लेख में हमने आपको हर्निया से छुटकारा पाने के घरेलू उपाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। हर्निया क्या है, हर्निया के प्रकार, हर्निया के कारण, हर्निया के लक्षण, हर्निया का परीक्षण, हर्निया का उपचार, हर्निया की सर्जरी, इन सब के बारे में भी विस्तार पूर्वक बताया।
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1 Comment

Shiv Kumar Kardam · December 9, 2021 at 3:59 am

It’s really beneficiary article

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